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श्लोक 2.97.20  |
तद्वाक्यं लक्ष्मण: श्रुत्वा व्रीडित: प्रत्युवाच ह।
त्वां मन्ये द्रष्टुमायात: पिता दशरथ: स्वयम्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम के पूर्वोक्त वचन सुनकर लक्ष्मण लज्जित होकर बोले - 'भैया! मुझे लगता है, हमारे पिता राजा दशरथ स्वयं आपसे मिलने आये हैं।' |
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| On hearing the aforesaid words of Shri Ram, Lakshmana felt ashamed and said - 'Brother! I think, our father King Dasharath himself has come to meet you.' |
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