श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.97.20 
तद्वाक्यं लक्ष्मण: श्रुत्वा व्रीडित: प्रत्युवाच ह।
त्वां मन्ये द्रष्टुमायात: पिता दशरथ: स्वयम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के पूर्वोक्त वचन सुनकर लक्ष्मण लज्जित होकर बोले - 'भैया! मुझे लगता है, हमारे पिता राजा दशरथ स्वयं आपसे मिलने आये हैं।'
 
On hearing the aforesaid words of Shri Ram, Lakshmana felt ashamed and said - 'Brother! I think, our father King Dasharath himself has come to meet you.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas