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श्लोक 2.97.19  |
तथोक्तो धर्मशीलेन भ्रात्रा तस्य हिते रत:।
लक्ष्मण: प्रविवेशेव स्वानि गात्राणि लज्जया॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| अपने धर्मनिष्ठ भाई की यह बात सुनकर, उसके कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने वाले लक्ष्मण लज्जा के मारे गश खाकर गिर पड़े॥19॥ |
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| On hearing this from his devout brother, Lakshman, who was always ready for his welfare, seemed to sink into his limbs in shame. 19॥ |
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