श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.97.17 
यदि राज्यस्य हेतोस्त्वमिमां वाचं प्रभाषसे।
वक्ष्यामि भरतं दृष्ट्वा राज्यमस्मै प्रदीयताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"यदि आप राज्य के लिए ऐसे कठोर शब्द कहते हैं, तो जब मैं भरत से मिलूँगा तो उनसे कहूँगा कि वे राज्य लक्ष्मण को दे दें।" 17.
 
"If you say such harsh words for the kingdom, then when I meet Bharata I will tell him to give the kingdom to Lakshmana." 17.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas