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श्लोक 2.97.16  |
कथं नु पुत्रा: पितरं हन्यु: कस्यांचिदापदि।
भ्राता वा भ्रातरं हन्यात् सौमित्रे प्राणमात्मन:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| सुमित्रानंदन! चाहे कितनी ही बड़ी विपत्ति क्यों न हो, पुत्र अपने पिता को कैसे मार सकता है? अथवा भाई अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय भाई को कैसे मार सकता है?॥16॥ |
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| 'Sumitra Nandan! No matter how big the calamity, how can a son kill his father? Or how can a brother kill his brother who is dearer to him than his own life?॥ 16॥ |
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