Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.97.14: ‘पूर्वकाल में भरत ने कब तुम्हारे प्रति कोई अप्रिय व्यवहार किया था, जिसके कारण आज तुम उससे इतना भयभीत हो और उसके विषय में ऐसी आशंका कर रहे हो?॥14॥   |   ramayan सर्ग 2.97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.97.14 
विप्रियं कृतपूर्वं ते भरतेन कदा नु किम्।
ईदृशं वा भयं तेऽद्य भरतं यद् विशङ्कसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘पूर्वकाल में भरत ने कब तुम्हारे प्रति कोई अप्रिय व्यवहार किया था, जिसके कारण आज तुम उससे इतना भयभीत हो और उसके विषय में ऐसी आशंका कर रहे हो?॥14॥
 
‘When in the past has Bharata shown any unpleasant behaviour towards you, due to which today you are feeling so afraid of him and have such apprehensions about him?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)