श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.96.5 
स तं सैन्यसमुद्धूतं शब्दं शुश्राव राघव:।
तांश्च विप्रद्रुतान् सर्वान् यूथपानन्ववैक्षत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री राम ने सेना में उत्पन्न हुए महान कोलाहल को सुना और उन सब युथपतियों को भागते हुए भी देखा॥5॥
 
Sri Rama heard the great uproar that emanated from the army and also saw all those Yuthapatis running away. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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