श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.96.24 
पूर्वापकारिणं हत्वा न ह्यधर्मेण युज्यते।
पूर्वापकारी भरतस्त्यागेऽधर्मश्च राघव॥ २४॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! जिसने पूर्वकाल में हमारा अनिष्ट किया हो, उसे मारने से कोई पाप नहीं करता। भरत ने पूर्वकाल में हमारा अनिष्ट किया है, अतः उसे मारना नहीं, अपितु जीवित छोड़ देना ही पाप है॥ 24॥
 
Raghunandan! No one is guilty of sin by killing someone who has harmed us in the past. Bharata has harmed us in the past, so it is sinful not to kill him but to leave him alive.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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