श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.96.10 
सुदुश्चरो गिरिश्चायं पक्षिणामपि लक्ष्मण।
सर्वमेतद् यथातत्त्वमभिज्ञातुमिहार्हसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘लक्ष्मण! इस पर्वत पर अज्ञात पक्षियों का आना-जाना बड़ा कठिन है (फिर यहाँ किसी हिंसक पशु या राजा का आक्रमण करना कैसे संभव है) अतः इन सब बातों की सही जानकारी प्राप्त करो॥10॥
 
‘Lakshmana! It is very difficult for unknown birds to come and go on this mountain (then how is it possible for a violent animal or a king to attack here). Therefore, get the correct information about all these things.’॥10॥
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