श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.95.9 
क्वचिन्मणिनिकाशोदां क्वचित् पुलिनशालिनीम्।
क्वचित् सिद्धजनाकीर्णां पश्य मन्दाकिनीं नदीम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'देखो! मन्दाकिनी नदी की कैसी शोभा है; कहीं उसका जल मोतियों के समान निर्मल बह रहा है, कहीं वह केवल ऊँचे तटों के कारण ही सुन्दर प्रतीत होती है (वहाँ का जल किनारों के पीछे छिपे होने के कारण दिखाई नहीं देता) और कहीं सिद्ध पुरुष उसमें डुबकी लगा रहे हैं और वह उनसे व्याप्त प्रतीत होती है॥9॥
 
'Look! What a beauty the Mandakini river has; somewhere it has water flowing as clear as pearls, somewhere it looks beautiful only because of its high banks (the water there is not visible because it is hidden behind the banks) and somewhere Siddhas (enlightened souls) are taking a dip in it and it appears to be pervaded by them.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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