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श्लोक 2.95.19  |
इतीव रामो बहुसंगतं वच:
प्रियासहाय: सरितं प्रति ब्रुवन्।
चचार रम्यं नयनाञ्जनप्रभं
स चित्रकूटं रघुवंशवर्धन:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसी अनेक प्रासंगिक बातें मंदाकिनी नदी से कहकर रघुवंश के रचयिता श्री राम अपनी प्रिय पत्नी सीता के साथ सुन्दर नीले रंग वाले चित्रकूट पर्वत पर विहार करने लगे। |
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| Speaking many such relevant things to the Mandakini river, Sri Rama, the creator of the Raghuvansh, started roaming around the beautiful blue-coloured Chitrakoot mountain with his beloved wife Sita. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे पञ्चनवतितम: सर्ग:॥ ९५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें पंचानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९५॥ |
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