श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.95.14 
सखीवच्च विगाहस्व सीते मन्दाकिनीं नदीम्।
कमलान्यवमज्जन्ती पुष्कराणि च भामिनि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'बहन सीता, जैसे एक सखी दूसरी सखी के साथ खेलती है, वैसे ही तुम भी मंदाकिनी नदी में उतरकर उसके जल में लाल और सफेद कमल डुबोकर उसमें स्नान करो।॥14॥
 
'Sister Sita, just as one friend plays with another friend, similarly you should go down to the Mandakini river and take a bath in it, dipping the red and white lotuses in its water.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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