| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 2.95.10  | निर्धूतान् वायुना पश्य विततान् पुष्पसंचयान्।
पोप्लूयमानानपरान् पश्य त्वं तनुमध्यमे॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | हे सुन्दरी, सुन्दर कटि वाली, देखो, वायु द्वारा लाए गए ये पुष्पों के ढेर मंदाकिनी के दोनों तटों पर कैसे फैले हुए हैं और अन्य पुष्पों के गुच्छे जल पर कैसे तैर रहे हैं॥10॥ | | | | 'O beautiful lady with a fine waist, look at how these heaps of flowers brought by the wind are spread on both banks of the Mandakini and how the other clusters of flowers are floating on the water.॥10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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