श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.94.24 
कुष्ठस्थगरपुंनागभूर्जपत्रोत्तरच्छदान्।
कामिनां स्वास्तरान् पश्य कुशेशयदलायुतान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'प्रिये! देखो, ये भोगियों के शय्याएँ हैं, जिन पर उत्पल, पुत्रजीवक, पुन्नाग और भोजपत्र के पत्ते चादर का काम देते हैं और उनके ऊपर सब ओर कमल के पत्ते बिछाए जाते हैं॥ 24॥
 
'Dear! Look, these are the beds of the pleasure-seekers, on which the leaves of Utpala, Putrajeevak, Punnaag and Bhojapatra serve as sheets and on top of them are spread lotus leaves on all sides.॥ 24॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas