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श्लोक 2.94.23  |
भित्त्वेव वसुधां भाति चित्रकूट: समुत्थित:।
चित्रकूटस्य कूटोऽयं दृश्यते सर्वत: शुभ:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा प्रतीत होता है मानो यह चित्रकूट पर्वत पृथ्वी को फाड़कर ऊपर उठ आया है। चित्रकूट का यह शिखर सब ओर से सुन्दर दिखाई देता है॥23॥ |
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| ‘It seems as if this Chitrakoot mountain has risen up by tearing the earth. This peak of Chitrakoot looks beautiful from all sides.॥ 23॥ |
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