श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.94.19 
इदमेवामृतं प्राहू राज्ञि राजर्षय: परे।
वनवासं भवार्थाय प्रेत्य मे प्रपितामहा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रानी! मेरे परदादा मनु आदि श्रेष्ठ राजर्षियों ने नियमपूर्वक किये गये इन वनवासों को अमृत कहा है; इससे शरीर त्यागने के बाद मनुष्य परम कल्याण को प्राप्त होता है। 19॥
 
'Queen! My great grandfather Manu etc. excellent royal sages have called these exiles done as per rules as nectar; Through this one attains ultimate welfare after leaving the body. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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