श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.94.16 
बहुपुष्पफले रम्ये नानाद्विजगणायुते।
विचित्रशिखरे ह्यस्मिन् रतवानस्मि भामिनि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'भामिनी! मैं इस विचित्र शिखर वाले सुन्दर पर्वत की ओर बहुत आकर्षित हूँ, जो अनेक पुष्पों और फलों से सुशोभित है और नाना प्रकार के पक्षियों से सुशोभित है॥16॥
 
'Bhamini! I am very much attracted to this beautiful mountain with its strange peak, which is adorned with many flowers and fruits and is adorned by various kinds of birds.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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