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श्लोक 15
श्लोक
2.94.15
यदीह शरदोऽनेकास्त्वया सार्धमनिन्दिते।
लक्ष्मणेन च वत्स्यामि न मां शोक: प्रधर्षति॥ १५॥
अनुवाद
'सती-साध्वी सीता! यदि मैं तुम्हारे और लक्ष्मण के साथ बहुत वर्षों तक यहाँ रहूँ, तो भी नगर छोड़ने का दुःख मुझे कभी नहीं सताएगा॥ 15॥
'Sati-sadhvi Sita! Even if I stay here with you and Lakshman for many years, the grief of leaving the city will never torment me.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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