| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 2.94.14  | गुहासमीरणो गन्धान् नानापुष्पभवान् बहून्।
घ्राणतर्पणमभ्येत्य कं नरं न प्रहर्षयेत्॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | गुफाओं से निकलने वाली, नाना प्रकार के पुष्पों की सुगन्ध लेकर आने वाली, नासिका को तृप्त करने वाली वायु किस पुरुष तक पहुँचकर उसके आनन्द को नहीं बढ़ाती? ॥14॥ | | | | ‘The wind emerging from the caves, carrying the rich fragrance of various kinds of flowers, satisfying the nostrils, does not reach which person and increase his joy? ॥ 14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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