श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.94.11 
शैलप्रस्थेषु रम्येषु पश्येमान् कामहर्षणान्।
किंनरान् द्वन्द्वशो भद्रे रममाणान् मनस्विन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'इन सुन्दर शैल शिखरों पर उन प्रदेशों को देखो, जो प्रेम और मिलन की भावना को उद्दीप्त करते हैं तथा आन्तरिक आनन्द को बढ़ाते हैं। वहाँ दो-दो करके बुद्धिमान किन्नर एक साथ विहार कर रहे हैं।॥11॥
 
'Look at those regions on these beautiful rock peaks, which stimulate the feeling of love and union and increase inner joy. There, two by two, the intelligent Kinnars are strolling together.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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