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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन
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श्लोक 5
श्लोक
2.93.5
तुरंगौघैरवतता वारणैश्च महाबलै:।
अनालक्ष्या चिरं कालं तस्मिन् काले बभूव सा॥ ५॥
अनुवाद
घोड़ों और बलवान हाथियों के समूहों से भरी हुई तथा दूर-दूर तक फैली हुई वह सेना उस समय बहुत समय तक दिखाई नहीं दी ॥5॥
That army, filled with groups of horses and mighty elephants and spread far and wide, was not visible for a long time at that time. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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