| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 2.93.22  | ते समालोक्य धूमाग्रमूचुर्भरतमागता:।
नामनुष्ये भवत्यग्निर्व्यक्तमत्रैव राघवौ॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | उस धुएँ को देखकर वे वापस आए और भरत से बोले, "प्रभु! जहाँ मनुष्य नहीं, वहाँ अग्नि भी नहीं। अतः श्रीराम और लक्ष्मण अवश्य ही यहाँ होंगे।" | | | | Seeing that smoke he came back and said to Bharata- 'Prabhu! Where there is no human being, there is no fire. Hence Shri Ram and Lakshmana must be here. | | ✨ ai-generated | | |
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