श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.93.20 
साधु सैन्या: प्रतिष्ठन्तां विचन्वन्तु च काननम्।
यथा तौ पुरुषव्याघ्रौ दृश्येते रामलक्ष्मणौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'मेरे सैनिकों को उचित रीति से आगे बढ़ना चाहिए और सभी दिशाओं में जंगल की खोज करनी चाहिए ताकि वे उन दो सिंह पुरुषों, श्री राम और लक्ष्मण को ढूंढ सकें।'
 
'My soldiers should advance in a proper manner and search the forest in all directions so that they may find those two lion-men, Sri Rama and Lakshmana.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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