श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.93.16 
स्यन्दनांस्तुरगोपेतान् सूतमुख्यैरधिष्ठितान्।
एतान् सम्पतत: शीघ्रं पश्य शत्रुघ्न कानने॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न! देखो, ये रथ घोड़ों द्वारा खींचे हुए तथा श्रेष्ठ सारथियों द्वारा चलाए हुए इस वन में कितनी तेजी से चल रहे हैं॥ 16॥
 
'Shatrughna! See how swiftly these chariots drawn by horses and driven by excellent charioteers are moving in this forest.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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