| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 2.93.13  | कुर्वन्ति कुसुमापीडान् शिर:सु सुरभीनमी।
मेघप्रकाशै: फलकैर्दाक्षिणात्या नरा यथा॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | 'ये सैनिक या वृक्ष, दक्षिण भारतीय लोगों की तरह, बादलों के समान चमकती ढालों से युक्त, अपने सिरों या शाखाओं पर सुगन्धित पुष्पों के आभूषण धारण करते हैं।॥13॥ | | | | 'These soldiers or trees, like the South Indian people, with shields shining like clouds, wear ornaments of fragrant flowers on their heads or branches.॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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