श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.92.9 
इति पृष्टस्तु भरतं भ्रातुर्दर्शनलालसम्।
प्रत्युवाच महातेजा भरद्वाजो महातपा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूछने पर महातपस्वी एवं पराक्रमी ऋषि भरद्वाज ने अपने भाई को देखने की इच्छा रखने वाले भरत से इस प्रकार कहा-॥9॥
 
On being asked in this manner, the great ascetic and mighty sage Bharadwaj replied thus to Bharata who was longing to see his brother -॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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