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श्लोक 2.92.9  |
इति पृष्टस्तु भरतं भ्रातुर्दर्शनलालसम्।
प्रत्युवाच महातेजा भरद्वाजो महातपा:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार पूछने पर महातपस्वी एवं पराक्रमी ऋषि भरद्वाज ने अपने भाई को देखने की इच्छा रखने वाले भरत से इस प्रकार कहा-॥9॥ |
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| On being asked in this manner, the great ascetic and mighty sage Bharadwaj replied thus to Bharata who was longing to see his brother -॥ 9॥ |
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