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श्लोक 2.92.8  |
आश्रमं तस्य धर्मज्ञ धार्मिकस्य महात्मन:।
आचक्ष्व कतमो मार्ग: कियानिति च शंस मे॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| 'धर्म ज्ञानी मुनीश्वर! मुझे बताइए कि धर्मात्मा महात्मा श्री राम का आश्रम कहाँ है? वह कितनी दूर है? और वहाँ पहुँचने का मार्ग कौन सा है? यह भी मुझसे स्पष्ट रूप से वर्णन कीजिए।'॥8॥ |
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| 'Dharma Gyani Munishwar! Tell me, where is the hermitage of the pious Mahatma Shri Ram? How far is it? And which is the route to reach there? Describe this also to me clearly.'॥ 8॥ |
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