श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.92.40 
सा सम्प्रहृष्टद्विपवाजियूथा
वित्रासयन्ती मृगपक्षिसंघान्।
महद्वनं तत् प्रविगाहमाना
रराज सेना भरतस्य तत्र॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस सेना के हाथी और घोड़े बड़े प्रसन्न हुए। भरत की सेना वन के मृगों और पक्षियों को भयभीत करती हुई उस विशाल वन में प्रवेश कर गई और वहाँ बड़ी शोभा पा रही थी॥40॥
 
The elephants and horses of that army were very happy. Bharata's army entered that huge forest, frightening the deer and birds of the forest and looked very beautiful there. ॥ 40॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे द्विनवतितम: सर्ग:॥ ९२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें बानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९२॥
 
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