श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.92.4 
तमुवाचाञ्जलिं कृत्वा भरतोऽभिप्रणम्य च।
आश्रमादुपनिष्क्रान्तमृषिमुत्तमतेजसम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब भरत ने आश्रम से बाहर आए हुए उन महाप्रतापी मुनि को प्रणाम किया और हाथ जोड़कर उनसे कहा -॥4॥
 
Then Bharata bowed to that great and illustrious sage who had come out of the hermitage and said to him with folded hands -॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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