श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.92.35 
विविधान्यपि यानानि महान्ति च लघूनि च।
प्रययु: सुमहार्हाणि पादैरपि पदातय:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उनके अधिकारी नाना प्रकार के छोटे-बड़े वाहनों पर सवार होकर चलते थे और पैदल सैनिक पैदल यात्रा करते थे ॥35॥
 
Their officers rode on various kinds of large and small vehicles and the infantry soldiers travelled on foot. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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