श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.92.31 
देवानां दानवानां च ऋषीणां भावितात्मनाम्।
हितमेव भविष्यद्धि रामप्रव्राजनादिह॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘श्री राम के वन में जाने से इस लोक में भगवान का चिंतन करने वाले देवता, दानव और महर्षि सबका कल्याण होगा ॥31॥
 
‘By going to Shri Ram's forest, the gods, demons and the great sages who contemplate on God will be benefited in this world. 31॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas