श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.92.3 
कच्चिदत्र सुखा रात्रिस्तवास्मद्विषये गता।
समग्रस्ते जन: कच्चिदातिथ्ये शंस मेऽनघ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'भोले भरत! क्या तुमने आज की रात हमारे आश्रम में आराम से बिताई? क्या तुम्हारे साथ आए सभी लोग इस आतिथ्य से संतुष्ट हुए हैं? यह बताओ।'
 
'Innocent Bharat! Have you spent this night comfortably in our ashram? Have all the people who came with you been satisfied with this hospitality? Tell me this.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)