श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 92: भरत का भरद्वाज मुनि से श्रीराम के आश्रम जाने का मार्ग जानना, वहाँ से चित्रकूट के लिये सेना सहित प्रस्थान करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.92.1 
ततस्तां रजनीं व्युष्य भरत: सपरिच्छद:।
कृतातिथ्यो भरद्वाजं कामादभिजगाम ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भरत और उनके परिवार ने महर्षि भारद्वाज की इच्छानुसार उनका आतिथ्य स्वीकार किया और पूरी रात आश्रम में ही रहे। फिर प्रातःकाल वे महर्षि भारद्वाज के पास जाने की अनुमति लेने गए॥1॥
 
Bharata and his family accepted the hospitality of the sage as per his wish and stayed in the ashram the whole night. Then in the morning they went to Maharishi Bharadwaj to seek his permission to leave.॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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