श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.91.8 
वाजिमुख्या मनुष्याश्च मत्ताश्च वरवारणा:।
प्रच्छाद्य भगवन् भूमिं महतीमनुयान्ति माम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! मेरे साथ बहुत से अच्छे घोड़े, मनुष्य और मतवाले हाथी हैं, जो बहुत बड़े क्षेत्र को घेरकर मेरे पीछे-पीछे चलते हैं॥8॥
 
'Lord! I am accompanied by many fine horses, men and drunken elephants, who cover a large area and follow me.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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