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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्लोक 76
श्लोक
2.91.76
दर्पणान् परिमृष्टांश्च वाससां चापि संचयान्।
पादुकोपानहं चैव युग्मान्यत्र सहस्रश:॥ ७६॥
अनुवाद
इतना ही नहीं, वहाँ बहुत-से स्वच्छ दर्पण, कपड़ों के ढेर और हजारों जोड़ी चप्पलें और जूते भी दिखाई दे रहे थे॥ 76॥
Not only that, there were also many clean mirrors, heaps of clothes and thousands of pairs of sandals and shoes visible.॥ 76॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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