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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.91.66 
नाशुक्लवासास्तत्रासीत् क्षुधितो मलिनोऽपि वा।
रजसा ध्वस्तकेशो वा नर: कश्चिददृश्यत॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
उस समय वहाँ एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं दिखाई देता था जिसके वस्त्र श्वेत न हों, जो भूखा या गंदा हो, या जिसके बाल धूल से सने हों।
 
At that time there was not a single person to be seen there whose clothes were not white, who was hungry or dirty, or whose hair was covered with dust. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)