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नाशुक्लवासास्तत्रासीत् क्षुधितो मलिनोऽपि वा।
रजसा ध्वस्तकेशो वा नर: कश्चिददृश्यत॥ ६६॥
अनुवाद
उस समय वहाँ एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं दिखाई देता था जिसके वस्त्र श्वेत न हों, जो भूखा या गंदा हो, या जिसके बाल धूल से सने हों।
At that time there was not a single person to be seen there whose clothes were not white, who was hungry or dirty, or whose hair was covered with dust. 66.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥