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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.91.64 
प्रेष्याश्चेटॺश्च वध्वश्च बलस्थाश्चापि सर्वश:।
बभूवुस्ते भृशं प्रीता: सर्वे चाहतवासस:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
सेवक, सैनिकों की पत्नियाँ और सैनिक, सभी नये वस्त्र पहनकर हर प्रकार से अत्यंत प्रसन्न हो गये।
 
Servants, wives of soldiers and soldiers, all wearing new clothes became extremely happy in every way. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)