श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.91.61 
सम्प्रहृष्टा विनेदुस्ते नरास्तत्र सहस्रश:।
भरतस्यानुयातार: स्वर्गोऽयमिति चाब्रुवन्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
भरत के साथ आये हजारों लोग उस स्थान की शोभा देखकर आनन्द से भर जाते थे और ऊंचे स्वर से कहते थे - यह स्थान स्वर्ग है।
 
Thousands of people who had come with Bharat were filled with joy on seeing the splendor of the place and used to say loudly - This place is heaven. 61.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas