श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.91.6 
भरत: प्रत्युवाचेदं प्राञ्जलिस्तं तपोधनम्।
न सैन्येनोपयातोऽस्मि भगवन् भगवद्भयात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब भरत ने हाथ जोड़कर उस तपस्वी ऋषि को उत्तर दिया - 'भगवन! आपके भय के कारण ही मैं सेना सहित यहाँ नहीं आया।
 
Then Bharata with folded hands replied to that ascetic sage - 'Lord! It was because of fear of you that I did not come here with the army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)