श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.91.51 
शिंशपाऽऽमलकी जम्बूर्याश्चान्या: कानने लता:।
मालती मल्लिका जातिर्याश्चान्या: कानने लता:।
प्रमदाविग्रहं कृत्वा भरद्वाजाश्रमेऽवसन्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
शिंशपा, आमलकी और जम्बू आदि स्त्रैण वृक्ष तथा मालती, मल्लिका और जति आदि वन लताएँ स्त्रियों का रूप धारण करके भारद्वाज ऋषि के आश्रम में बस गईं ॥51॥
 
Feminine trees like Shinshpa, Amalaki and Jambu and forest creepers like Malti, Mallika and Jati took the form of women and settled in the ashram of sage Bhardwaj. 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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