श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.91.50 
तत: सरलतालाश्च तिलका: सतमालका:।
प्रहृष्टास्तत्र सम्पेतु: कुब्जा भूत्वाथ वामना:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवदारु, ताल, तिलक और तमाल वृक्ष कुबड़े और बौने वृक्ष बन गए और बड़े हर्ष के साथ भरत के सामने प्रकट हुए ॥50॥
 
Thereafter the Devadaru, Tal, Tilak and Tamala trees became hunchbacked and dwarf trees and appeared before Bharata with great joy. ॥50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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