श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.91.49 
बिल्वा मार्दङ्गिका आसन् शम्याग्राहा बिभीतका:।
अश्वत्था नर्तकाश्चासन् भरद्वाजस्य तेजसा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
भरद्वाज मुनि के तेज से बेल के वृक्ष मृदंग बजाते थे, बहेड़ा के वृक्ष शम्या नामक ताल देते थे और पीपल के वृक्ष वहाँ नृत्य करते थे ॥49॥
 
With the brilliance of Bhardwaj Muni, the Bael trees used to play Mridanga, the Baheda trees used to give a rhythm called Shamya and the Peepal trees used to dance there. 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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