श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.91.48 
यानि माल्यानि देवेषु यानि चैत्ररथे वने।
प्रयागे तान्यदृश्यन्त भरद्वाजस्य तेजसा॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जो पुष्प देवताओं के उद्यानों में तथा चैत्ररथ वन में पाए जाते हैं, वे महर्षि भारद्वाज के तेज से प्रयाग में दिखाई देने लगे ॥48॥
 
The flowers which are found in the gardens of the gods and in the Chaitrarath forest began to be seen in Prayag due to the power of the great sage Bharadwaj. ॥ 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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