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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार
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श्लोक 47
श्लोक
2.91.47
अलम्बुषा मिश्रकेशी पुण्डरीकाथ वामना।
उपानृत्यन्त भरतं भरद्वाजस्य शासनात्॥ ४७॥
अनुवाद
अलंबुषा, मिश्रकेशी, पुण्डरीक और वामन- ये चारों अप्सराएँ ऋषि भारद्वाज के आदेश से भरत के पास नृत्य करने लगीं। 47॥
Alambusha, Mishrakeshi, Pundarika and Vamana – these four Apsaras started dancing near Bharat on the orders of sage Bhardwaj. 47॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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