श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.91.43 
तेनैव च मुहूर्तेन दिव्याभरणभूषिता:।
आगुर्विंशतिसाहस्रा: ब्रह्मणा प्रहिता: स्त्रिय:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उसी समय ब्रह्माजी द्वारा भेजे गए दिव्य आभूषणों से सुसज्जित बीस हजार देवकन्याएँ वहाँ आ पहुँचीं ॥ 43॥
 
At the same moment twenty thousand celestial maidens adorned with divine ornaments sent by Lord Brahma arrived there. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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