श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.91.41 
ततस्तत्र मुहूर्तेन नद्य: पायसकर्दमा:।
उपातिष्ठन्त भरतं भरद्वाजस्य शासनात्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दो घड़ी के अन्दर ही ऋषि भारद्वाज की आज्ञा से भरत की सेवा में नदियाँ प्रकट हो गईं, जो कीचड़ के स्थान पर खीर से भरी हुई थीं ॥41॥
 
Thereafter, within two hours, by the order of sage Bharadwaj, rivers appeared in the service of Bharata, which were filled with kheer instead of mud. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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