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ramayan 2.91.4: परन्तु इस समय मैं आपकी सेना को भोजन कराना चाहता हूँ। हे पुरुषश्रेष्ठ! इससे मुझे प्रसन्नता होगी और आप वही करें जो मुझे अच्छा लगे॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.91.4 
सेनायास्तु तवैवास्या: कर्तुमिच्छामि भोजनम्।
मम प्रीतिर्यथारूपा त्वमर्हो मनुजर्षभ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
परन्तु इस समय मैं आपकी सेना को भोजन कराना चाहता हूँ। हे पुरुषश्रेष्ठ! इससे मुझे प्रसन्नता होगी और आप वही करें जो मुझे अच्छा लगे॥4॥
 
‘But at this time I want to feed your army. O best of men! This will please me and you must do whatever pleases me.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)