श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.91.33 
सितमेघनिभं चापि राजवेश्म सुतोरणम्।
शुक्लमाल्यकृताकारं दिव्यगन्धसमुक्षितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजपरिवार के लिए निर्मित दिव्य महल अपने सुंदर द्वारों सहित श्वेत मेघों के समान शोभायमान था। वह श्वेत पुष्पों की मालाओं से सुशोभित था तथा दिव्य सुगन्धित जल से सिंचित था। 33.
 
The divine palace built for the royal family with its beautiful gate looked beautiful like white clouds. It was decorated with garlands of white flowers and watered with divine fragrant water. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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