श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.91.31 
उत्तरेभ्य: कुरुभ्यश्च वनं दिव्योपभोगवत्।
आजगाम नदी सौम्या तीरजैर्बहुभिर्वृता॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उत्तर कुरुवर्ष से दिव्य द्रव्यों से परिपूर्ण चैत्ररथ नामक वन वहाँ आया। उसके साथ ही उस स्थान की सुन्दर नदियाँ भी आईं, जिनके किनारों पर अनेक वृक्ष थे॥31॥
 
From Uttara Kuruvarsha, a forest called Chaitraratha, full of divine material offerings, came there. Along with it, the beautiful rivers of that place also arrived, which were surrounded by numerous trees on the banks.॥ 31॥
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