श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.91.3 
अथोवाच भरद्वाजो भरतं प्रहसन्निव।
जाने त्वां प्रीतिसंयुक्तं तुष्येस्त्वं येन केनचित्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर भरद्वाजजी ने मुस्कुराते हुए भरत से कहा - 'भरत! मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे प्रेम करते हो; इसलिए मैं तुम्हें जो कुछ भी दूँगा, उसी से तुम संतुष्ट होगे।'
 
On his saying this, Bharadwajji smilingly said to Bharata - 'Bharata! I know, you love me; therefore whatever I give you, you will be satisfied with that.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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