श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.91.27 
स शब्दो द्यां च भूमिं च प्राणिनां श्रवणानि च।
विवेशोच्चावच: श्लक्ष्ण: समो लयगुणान्वित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वह संगीतमय ध्वनि पृथ्वी, आकाश और प्राणियों के कानों में प्रवेश करके प्रतिध्वनित होने लगी। वह ध्वनि आरोहण और अवरोहण के साथ कोमल और मधुर थी, लय से भिन्न थी और लय के गुण से युक्त थी॥27॥
 
That musical sound entered the earth, the sky and the ears of the living beings and began to reverberate. That sound, with its ascent and descent, was soft and sweet, distinct from the rhythm and was endowed with the quality of rhythm.॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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